सेहत के लिए हानिकारक हैं जरूरत से ज्यादा मल्टी-विटामिन्स

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आमतौर पर मल्टी-विटामिन्स (Multi-Vitamins) को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है। अगर शरीर में ज़रूरी तत्व और विटामिन्स की कमी है, तो उसे मल्टी-विटामिन्स के ज़रिए पूरा किया जाता है, लेकिन अब जो बात सामने आई है उस पर गौर करें तो मल्टी-विटामिन्स से हार्ट संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

कार्डियोलॉजी (Cardiology) में पब्लिश हुई एक रिसर्च के मुताबिक, जब बात हार्ट संबंधी बीमारियों को रोकने की आती हैं, तो हेल्थ (Health) सप्लिमेंट्स का या तो बेहद कम असर होता है या फिर वे बेअसर होती हैं। वहीं कुछ हार्ट संबंधी बीमारियों के रिस्क को बढ़ा देती हैं।

 

डॉक्टरों का कहना है कि इन निष्कर्षों का भारत पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने वाला है क्योंकि बीते कुछ सालों में भारत में हेल्थ सप्लिमेंट्स (Health supplements) का इस्तेमाल कई गुना बढ़ा है। यहां लोग या तो खुद ही हेल्थ सप्लिमेंट्स का प्रयोग करते हैं या फिर डॉक्टर ही उन्हें प्रस्क्राइब करते हैं। (Fortis C-Doc) के चेयरमैन डॉ. अनुप मिश्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि लोग अपने शरीर में कुछ ज़रूरी तत्वों की कमी पूरी करने के लिए खुद ही हेल्थ सप्लिमेंट्स लेने लगते हैं और कई बार डॉक्टर ही उन्हें लेने की सलाह देते हैं।

 

विटामिन्स का महत्व-

 

हमारे स्वास्थ्य (Health) और शारीरिक विकास के लिए विटामिन्स आवश्यक हैं, जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं। विटामिन (Vitamin) शरीर को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जरूरी हैं। विटामिन्स दो प्रकार के होते हैं.

 

फैट सॉल्युबल विटामिन्स-

 

जैसे विटामिन ए,डी,ई, और के. जो शरीर में संचित किए जा सकते हैं। ये संचित विटामिंस कुछ समय तक शरीर की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। अगर लगातार हम कुछ समय तक ये पदार्थ नहीं खाते, तो शरीर में फैट सॉल्युबल विटामिन्स (Fat Soluble Vitamins) की कमी हो जाती है। फैट सॉल्युबल विटामिन्स अधिकतर हमें जानवरों से प्राप्त होते है। अगर शाकाहारी लोग संतुलित आहार ग्रहण न करें, तो इन विटामिनों की कमी होने का खतरा ज्यादा होता है। जरूरत से ज्यादा मात्रा में इन विटामिन्स को लेना शरीर के लिए हानिकारक है।

 

विटामिन-बी कॉम्पलेक्स-

 

बारह प्रकार के अलग-अलग विटामिन्स का एक समूह है, जो शरीर में ऊर्जा संबंधी जरूरत के अलावा और कई कार्य करते हैं। वाटर सॉल्युबल विटामिन्स   (Water Soluble Vitamins) को लगभग रोज लेना पड़ता है। ताजे फल और सब्जियां इनके मुख्य स्रोत हैं। थोड़े समय भी ताजा फलों और सब्जियां के न लेने से इन विटामिनों की कमी हो सकती है। इन विटामिन्स (Vitamins) की शरीर में साधारणत: अधिकता नहीं होती, क्योंकि ज्यादा मात्रा में लेने पर ये पेशाब के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

 

2012 के राष्ट्रीय आंकड़ों से पता चला है कि अमेरिका में 52 पर्सेंट आबादी ये सप्लिमेंट्स लेती है। 31 पर्सेंट आबादी मल्टी-विटामिन (Multi-Vitamin) लेती है, जबकि 19 पर्सेंट आबादी विटामिन डी, 14 पर्सेंट आबादी कैल्शियम तो वहीं 12 पर्सेंट आबादी विटामिन सी लेती है।

 

कैंसर (Cancer) और न्युट्रिशन डेटा (Nutrition Data) को लेकर रिसर्च करने वाली यूरोपियन प्रॉस्पेक्टिव इन्वेस्टिगेशन (European Prospective Investigation) कंपनी के आंकड़ों से भी यह बात ज़ाहिर हुई कि वहां कि आबादी भी सप्लिमेंट्स लेती है, जैसे कि डेनमार्क में 51 पर्सेंट पुरुष तो 66 पर्सेंट महिलाएं सप्लिमेंट्स का सेवन करती हैं।

 

एक्सपर्ट्स की मानें तो चूंकि ये सप्लिमेंट्स मेडिकल स्टोर या केमिस्ट काउंटर पर आसानी और ढेर सारी मात्रा में मिल जाते हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि ये हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हैं और ड्रग (Drugs) कंपनियां लोगों की इन्ही भावनाओं का गलत फायदा उठा रही हैं। उन्हें विश्वास दिलाया जाता है कि अगर वे मल्टी-विटामिन्स (Multi-Vitamins) लेंगे तो कम थकान महसूस करेंगे और फिजिकली फिट रहेंगे।

 

रिपोर्ट्स की मानें तो भारत में (Nutraceutical Industry) यानी ये हेल्थ सप्लिमेंट बनाने वाली इंडस्ट्री का बिजनस करीब 2.2 मिलियन डॉलर है जबकि आहार संबंधी सप्लिमेंट्स 32 पर्सेंट मार्केट कवर करते हैं। एम्स में कार्डियोलॉजी (Cardiology) के प्रफेसर डॉ. संदीप मिश्रा कहते हैं कि अब लोगों को आगाह किए जाने की ज़रूरत है कि वे ज़रूरत से ज़्यादा सप्लिमेंट्स न खाएं। ये तभी मदद कर सकते हैं जब किसी विटामिन या मिनरल की हमारे शरीर में कमी है, वरना इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है।


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