जाने क्या है गर्भावधि मधुमेह और बच्चों पर कैसे पड़ता है इसका असर !

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गर्भावधि मधुमेह क्या है?

 

गर्भावधि मधुमेह (जैस्टेशनल डायबिटीज) केवल गर्भवती महिलाओं को होती है। यह तब होती है, जब गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के खून में ग्लूकोज की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है।

 

अगर, आपका शरीर इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में नहीं करता है, तो आपके शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। इंसुलिन हमारी निम्न तरीके से मदद करती है, यह शरीर की मांसपेशियों की मदद करती है, जिससे की हमारा शरीर ऊर्जा के लिए ब्लड शुगर का इस्तेमाल कर सकें।

 

गर्भावधि मधुमेह के लक्षण

 

अक्सर गर्भावधि मधुमेह के लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं, जैसे की –

 

 

  • मुंह सूखना,

 

  • अधिक प्यास लगना,

 

  • अत्याधिक पेशाब आना,

 

  • बार-बार संक्रमण होना,

 

  • धुंधला दिखाई देना,

 

अगर, आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हों, तो अपने डॉक्टर से बात करें।

 

गर्भावधि मधुमेह, महिला के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके होने वाले बच्चो पर भी बहुत बुरा प्रभाव डालता है, जो की बच्चे के विकास के लिए सही नहीं है। ऐसी स्थिति में शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर सामान्य रखना बहुत ही मुश्किल हो जाता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा नियंत्रण में न हो तो गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, और प्रसव में समस्या होना और भी कई अन्य समस्या हो सकती हैं। ऐसे में ध्यान रखना जरुरी है, की गर्भावधि मधुमेह में क्या किया जाए और क्या नहीं।

 

संतुलित आहार का सेवन करे

 

  • गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए, जो की माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

 

  • संतुलित आहार का सही समय पर सेवन करने से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित रहती हैं। जैस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं के लिए आहार की सलाह, जो उन्हें रोज सेवन करना चाहिए –

 

कार्बोहाइड्रेट

 

 गर्भवती महिलाओं को उच्च फाइबर, पूरे अनाज वाले कार्बोहाइड्रेट खाने चाहिए।

 

स्टार्चयुक्त सब्जियां

 

  • रोटी, अनाज, सेम, चावल, और स्टार्चयुक्त सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

 

  • हरे और पीले रंग की सब्जियां जैसे की -पालक, ब्रोकोली, गाजर, टमाटर रोज खाएं।

 

दूध या दूध से बने उत्पाद

 

प्रतिदिन दूध या दूध से बने उत्पादों का सेवन बहुत जरुरी होता है।

 

एक्सरसाइज करें और एक्टिव रहें

 

गर्भवती महिला को रोज लगभग 30 मिनट तक व्यायाम करना चाहिए और साथ ही सुबह के समय वॉक करना भी लाभदायक होता हैं। और व्यायाम करने से शरीर में इन्सुलिन की मात्रा भी सही रहती है। लेकिन व्यायाम करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

 

मेडीटेशन करें

 

मेडीटेशन करें, इससे दिल और दिमाग दोनों शांत रहते है और हार्मोन्स भी संतुलित रहते हैं।

 

समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं

 

  • डॉक्टर से समय-समय पर संपर्क करती रहें, जो की गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

 

  • गर्भावधि मधुमेह में शुगर की जांच बहुत महत्वपूर्ण है। जो की ग्लूकोजमीटर से दिन में एक से दो बार घर पर ही शुगर की जांच कर सकते है।

 

खुद से न करें इंसुलिन का उपयोग

 

डॉक्टर की सलाह के बिना इंसुलिन का उपयोग न करे। इसके बारे में ड़ॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

 

बच्चे के वजन को न करें नज़रअंदाज

 

अगर गर्भवती महिला में मधुमेह की बीमारी है, तो इससे गर्भ में पल रहे बच्चो को भी मधुमेह की समस्या और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है।

 

गर्भावधि मधुमेह में होनी वाली समस्याएं

 

जांडिस

 

  • गर्भवती महिला को अगर मधुमेह की समस्या होती है, तो न्यूबोर्न बेबी में जांडिस होने की भी संभावना कई गुणा बढ़ जाती है, और मधुमेह होने का खतरे भी बढ़ सकता हैं।

 

  • अगर गर्भवती महिला को जैस्टेशनल डायबिटीज की शिकायत होती है, तो बच्चों में भी टाइप–2 डायबीटीज होने के खतरा हो सकता है।

 

बच्चे में विकासात्मक समस्याएं

 

जिन गर्भवती महिलाओं में गर्भावधि मधुमेह (जैस्टेशनल डायबीटीज) की समस्याएं होती हैं, उन बच्चो में विकासात्मक समस्याएं होने की संभावना होती है।

 

गर्भावधि मधुमेह का इलाज कैसे किया जाता है?

 

  • गर्भावधि मधुमेह के लिए उपचार आपके रक्त शर्करा के स्तर पर निर्भर करता है।

 

  • कई मामलों में, गर्भावधि मधुमेह का इलाज आहार और व्यायाम से किया जा सकता है। कुछ मामलों में, आपको अपने रक्त शर्करा को कम करने के लिए मेटफॉर्मिन (Metformin) (ग्लूकोफेज,(Glucophage)) या इंजेक्टेबल इंसुलिन जैसी मौखिक दवा लेने की जरुरत पड़ सकती है।

 

एक स्वस्थ गर्भावस्था के लिए अन्य कदम

 

अच्छी तरह से संतुलित आहार बनाए रखने के अलावा, अन्य चीजें हैं, जो आप एक स्वस्थ गर्भावस्था के लिए कर सकते हैं:

 

  • नियमित रूप से व्यायाम करें या सप्ताह में तीन दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करना याद रखें। नियमित व्यायाम भी आपके रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखने में मदद करेगा।

 

  • हर दो घंटे में खाएं। अपने रक्त शर्करा के स्तर को नियमित करने के लिए, भोजन को कभी न छोड़ें और हर दो घंटे में स्वस्थ नाश्ता या भोजन करे।

 

  • प्रसव पूर्व विटामिन ले।

 

 

अगर आपको गर्भावधि मधुमेह है, तो आपको आगे चलकर टाईप 2 मधुमेह होने की संभावना हो सकती है। इस संभावना को कम करने के लिए आप स्वस्थ आहार, वजन नियंत्रण और व्यायाम करे। और समस्य-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहे।


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